न्यायालयिक विज्ञान के सिद्धांत
न्यायालयिक विज्ञान (फॉरेंसिक साइंस) वह वैज्ञानिक अनुशासन है जिसमे भौतिक साक्ष्य की जांच, मान्यता, निश्चयीकरण और मूल्यांकन किया जाता है। यह सामान्य विज्ञान के नियम एवम सिधांत को कानून के प्रयोग के उपयुक्त बनाने का विज्ञान है। अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में इसका बहुत महत्व है।[1]
सिद्धांत
न्यायालयिक विज्ञान के नियम एवम सिधांत निम्न है:-
वैयाकित्ता का नियम (Law of individuality)
- - सभी वस्तु, प्राकर्तिक या मानव द्वारा निर्मित की गई, अपने आप में विशिष्ट होती है और किसी और वस्तु के शत प्रतिशत सामान्य नही हो सकती! यह तक की जुडवा लोगो की भी हर एक चीज़ सामान्य नही होती! वैयाकित्ता का नियम बहुत से शेत्रो में जांचा गया है और यह न्यायालयिक विज्ञान के शेत्र में अत्यधिक महत्व रखता है।
विनिमय का सिधांत (Principle of Exchange)
संपर्क में आने पर दो वस्तुओ में आदान-प्रदान होता है! इसके अनुसार जब भी कोई अपराधी किसी भी वस्तु, किसी पीड़ित मनुष्य या आस पास के संपर्क में आएगा तो सदेव अपने चिन्ह छोडके जाएगा और आस पास के स्थल से कुछ चिन्ह ले जाता है! इन चिन्हों की जांच और पहचान करके संदिग्ध अपराधी का पता लगाया जा सकता है! यह सिधांत सबसे पहले फ्रांस के वैज्ञानिक सर अद्मोंद लोकार्द ने दिया था तभी इस सिधांत को "लोकार्द प्रिन्सिप्ले ऑफ़ एक्सचेंज ( locard principle of Exchange) के नाम से भी जाना जाता है|
प्रगतिशील परिवर्तन का नियम (Law of Progressive Change)
यह नियम यह दर्शाता है की समय के साथ-साथ हर वस्तु में परिवर्तन होते है। यह नियम न्यायालयिक विज्ञान में बहुत महत्व रखता है क्यूंकि अपराधी हो या अपराध स्थल या फिर आस पास की वस्तुए, समय के साथ शिग्र्हा ही परिवर्तित हो जाती है|
तुलना का सिधांत (Law of Comparison)
"केवल एक जैसी वस्तुओ की तुलना की जा सकती है",अर्थात किसी भी वस्तु की किसी और वस्तु से तुलना करनी हो तो एक जैसा दिखने वाला अर्थात देखने पर एक सामान लगने वाली वस्तु से ही की जाएगी।
विश्लेषण का सिद्धान्त (Law of Analysis)
इस सिद्धान्त का मतलब यह है की परीक्षण और जांच के लिए भेजा गया नमूना जितना अच्छा होता है, उतने ही अच्छे उसके परिणाम आते है ! इसलिए घटना स्थल पर पाए गए भौतिक साक्ष्यो का अच्छे से संग्रहण और सुरक्षा की जानी चाहिए ताकि वह जांच और परिक्षण होने तक ख़राब न होए |
संभावना का सिधांत (Law of Probability)
प्रत्येक प्रकार की पहचान, निश्चित व् अनिश्चित, हमेशा सम्भावना के सिद्धांत द्वारा ही की जाती है|
परिस्थितिजन्य तथ्यों का नियम ( Law of Circumstantial facts)
इस सिद्धांत के अनुसार परिस्थ्तिजनक साक्ष्य किसी की भी मौखिक गवाही से अधिक महत्वपूर्ण होते है। परिस्थ्तिजनक सक्शो को झुठलाया नहीं जा सकता है। यह सिद्धांत इस चिंतन पर आधारित है कि व्यक्ति झूठ बोल सकता है किंतु तथ्य नहीं। [2][3]